भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत | मालदीव में चीन समर्थक सरकार का राज ख़तम

दोस्तों आप सभी को यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है की मालदीव में अब भारत समर्थक सरकार बनने जा रही है। जी हाँ दोस्तों पिछले 5 सालो में भारत मालदीव के रिश्ते बद से बदतर होते चले जा रहे थे। मालदीव के राष्टपति यामीन अब्दुल गयूम ने पिछले 5 सालो में हर वो काम किया जो भारत विरोधी था। मालदीव के राष्टपति यामीन अब्दुल गयूम ने चीन को न सिर्फ अपने यहाँ बंदरगाह दी बल्कि भारत विरोधी अन्य काम भी जमकर किये। इसी का नतीजा था की भारत ने कड़ा रुख अपनाकर मालदीव सरकार को पहले तो अलग थलग किया फिर दबाव बनाया।

भारत ने कैसे मालदीव पर दबाव बनाया?

दोस्तों आपको याद होगा की मालदीव ने भारत के सारे प्रोजेक्ट्स एक-एक करके चीन को सौंप दिए थे। बदले में चीन भी मालदीव को पैसो का लालच देकर अपनी तरफ करता रहा। मालदीव के राष्टपति यामीन अब्दुल गयूम अपने इसी घमंड में भारत की सुरक्षा को भूल गए। नतीजा यह हुआ की भारत सरकार ने मालदीव से राजनितिक संबंद में दुरी बना ली। आगे जाकर भारत ने मालदीव को संयुक्त राष्ट में भी अलग थलग कर दिया। इसके साथ ही भारत में मालदीव से उपहार में दिए गए 3 हेलीकाप्टर भी वापस मंगवा लिए। मालदीव को सबसे बड़ा झटका संयुक्त राष्ट संघ में लगा जब मालदीव गैर स्थायी सीट भी नहीं जीत सका।

मालदीव की नयी सरकार का रुख भारत के साथ केसा रहेगा?

दोस्तों मालदीव में राष्ट्रपति का चुनाव इब्राहिम मोहमद सोलह जीते है। इब्राहिम मोहमद सोलह भारत के करीबी माने जाते है। हलाकि अभी मालदीव के नए राष्टपति चीन से दुरी नहीं बना पाएंगे। इसका कारण है वो कर्जा जो मालदीव ने चीन से लिया हुआ है। इस कर्जो को ध्यान में रखकर ही मालदीव अपनी आगे की रणनीति बनाएगा। परन्तु भारत को इस बात से फर्क नहीं पढ़ना चहीये। मालदीव के नए राष्टपति भारत के साथ आगे बढ़ने की बात कर चुके है। भारत मालदीव को खाने पिने से लेकर आयल भी निर्यात करना है। नई सरकार के आने से भारत फिरसे अपना निर्यात मालदीव में बड़ा पायेगा।

 

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